मंगलवार, 7 जून 2011

छल्ला




छल्ला

छल्ले में लटकी थी चाभी
छल्ले को चाभी की ऐसी आदत 
जब चाभी मांगता छल्ला साथ - साथ चला आता

छल्ले के बिना गुम जाए फिर भी कभी चाभी
अकेले छल्ले का क्या
मिले-न–मिले
रहे–न–रहे

चाभी जब खोलती है ताला
डूब कर तन्मय
छल्ला करता रहता इन्तज़ार

फिर चाभी निकल आती उसी के सहारे
जैसे कुएं से भर कर पानी
बाल्टी आ जाए रस्सी चढ़-चढ़ कर

खिटपिट करती चाभियां
पर रहती साथ ही

छल्ले के पास संदेशों के कई बुशर्ट
चाभियाँ एक रंगी
ऊँची-नीची दांतों वाली

रहस्य के तिलिस्म में चाभियां तितली की तरह बैठती हैं
तो लौट आती हैं छल्ले के घोंसले में चिड़ियों की तरह चीं चीं करतीं.





13 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

चाभी जब खोलती है ताला
डूब कर तन्मय
छल्ला करता रहता इन्तज़ार

फिर चाभी निकल आती उसी के सहारे
जैसे कुएं से भर कर पानी
बाल्टी आ जाए रस्सी चढ़-चढ़ कर
bahut hi behtareen khyaal

रश्मि प्रभा... ने कहा…

contact me at rasprabha@gmail.com

Aparna Manoj Bhatnagar ने कहा…

छल्ले के बिना गुम जाए फिर भी कभी चाभी
अकेले छल्ले का क्या
मिले-न–मिले
रहे–न–रहे ...

चाभी जब खोलती है ताला
डूब कर तन्मय
छल्ला करता रहता इन्तज़ार

फिर चाभी निकल आती उसी के सहारे
जैसे कुएं से भर कर पानी
बाल्टी आ जाए रस्सी चढ़-चढ़ कर....

sochne ko majboor karti kavita.. badhai!

वन्दना ने कहा…

बेहद गहन अभिव्यक्ति।

बेनामी ने कहा…

i am buring with curiosity.nice yar.fir mujhe deede e tar yaad aaya.

Nirmal Paneri ने कहा…

रहस्य के तिलिस्म में चाभियां तितली की तरह बैठती हैं
तो लौट आती हैं छल्ले के घोंसले में चिड़ियों की तरह चीं चीं करतीं......वाह बहुत खूब कही है सर ...सुन्दर शाब्दिक अभिव्यक्ति !!!!!!!!!!!

Purushottam Agrawal ने कहा…

बहुत ही अच्छी कविता है अरुण। बधाई।इन दिनों तुम्हारा संकलन भी पढ़ रहा हूं और प्रभावित हो रहा हूँ।

गीता पंडित ने कहा…

छल्ले के बिना गुम जाए फिर भी कभी चाभी
अकेले छल्ले का क्या
मिले-न–मिले
रहे–न–रहे ...

चाभी जब खोलती है ताला
डूब कर तन्मय
छल्ला करता रहता इन्तज़ार


क्या कहूँ आपकी हर रचना ने मोहित किया है ...
आपका संकलन पढ़ने का मन है...अरुण जी...

सुमन केशरी ने कहा…

रहस्य के तिलिस्म में चाभियां तितली की तरह बैठती हैं
अनेक अर्थ गहती कविता..
बधाई...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की किसी पोस्ट की कल होगी हलचल...
नयी-पुरानी हलचल

धन्यवाद!

jigyasa ने कहा…

बेहद ही गहरे भाव अभिव्यक्ति के साथ वैसे ही गुंथे हैं जैसा छल्ले में चाभी. शुभकामनायें !

Priyankaabhilaashi ने कहा…

उम्दा ख्याल..!!

परितोष ने कहा…

बहुत ही अच्छी कविता